👁 26 views
Written by@mare
हिन्दी (Hindi) August 15, 2026

अब हर चीज़ ऐप से होती है… लेकिन क्या यह सच में बेहतर है

अब हर चीज़ ऐप से होती है… लेकिन क्या यह सच में बेहतर है

कुछ दिन पहले मैं चाय लेने गया और दुकानदार ने कहा, “कैश नहीं है? QR स्कैन कर दो।”

मैं हँस पड़ा।

कुछ साल पहले तक हम जेब में पैसे लेकर निकलते थे। आज फोन घर पर भूल जाएँ तो ऐसा लगता है जैसे आधी जिंदगी घर पर छोड़ आए हों।

चाय के 20 रुपये हों, ऑटो का किराया हो, सब्ज़ी खरीदनी हो या दोस्त को पैसे देने हों — फोन निकालो और पेमेंट कर दो।

सच कहूँ तो मुझे यह सुविधा पसंद है।

लेकिन कभी-कभी लगता है कि हम बहुत जल्दी बदल गए हैं।

अब खाना ऐप से आता है।

टैक्सी ऐप से आती है।

किराने का सामान ऐप से आता है।

फिल्म फोन पर देखते हैं।

दोस्तों से फोन पर बात करते हैं।

और कई बार पड़ोस में कौन रहता है, यह भी नहीं जानते।

टेक्नोलॉजी ने जिंदगी आसान जरूर की है, लेकिन शायद हमें थोड़ा आलसी भी बना दिया है।

पहले सब्ज़ी लेने जाते थे तो दुकानदार से दो बातें हो जाती थीं।

आज “डिलीवरी एट डोर” है।

पहले दोस्त से मिलने जाते थे।

आज एक इमोजी भेज देते हैं।

मैं यह नहीं कह रहा कि पुराना समय बेहतर था।

नई सुविधाएँ अच्छी हैं और मैं खुद उनका इस्तेमाल करता हूँ।

बस कभी-कभी सोचता हूँ:

अगर फोन एक दिन बंद हो जाए, तो क्या हमें अभी भी पता है कि बिना ऐप के सामान्य जिंदगी कैसे जी जाती है?

👁 26 views
💬 0 Comment

Comments 0

No comments yet. Start the conversation.